बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..
हमे खो दोगे तो पछताओगे बहुत, ये आखरी गलती जरा सोच समझकर करना…
में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा
हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे
बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..
हमे खो दोगे तो पछताओगे बहुत, ये आखरी गलती जरा सोच समझकर करना…
में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा
हमारी बराबरी करने जाओगे तो बिक जाओगे
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे