जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .
मुझे मत ढूंढो हजारो मै हम बीका नहीं करते बाजारों मै
रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो, हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
मत पूछो कि कैसे हैं तुम कभी भूल नहीं पाओगे ऐसे हैं हम
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .
मुझे मत ढूंढो हजारो मै हम बीका नहीं करते बाजारों मै
रहना है तो मेरा रहे वरना जिसका होना हो, हो ले अब कोई मगजमारी नहीं.
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
मत पूछो कि कैसे हैं तुम कभी भूल नहीं पाओगे ऐसे हैं हम