इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने हमें इश्क का शौक है आवारगी का नहीं
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं
इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने हमें इश्क का शौक है आवारगी का नहीं
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं