मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
वफादार और तुम….?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम……?? इल्जाम भी अच्छा है….!!
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
वफादार और तुम….?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम……?? इल्जाम भी अच्छा है….!!
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं