हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला
हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला