सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
अंदाज़े से मत नापिये हमारी हस्ती को, ठहरे हुए समुन्दर अक्सर गहरे होते हैं
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
जलना जलाना यह सब फ़ुज़ूल है, अपने काम में मस्त रहना यह अपना उसूल है
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
मुझे लड़की चाहिए kurkure जैसी जो टेढ़ी हो पर मेरी हो।
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
अंदाज़े से मत नापिये हमारी हस्ती को, ठहरे हुए समुन्दर अक्सर गहरे होते हैं
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
जलना जलाना यह सब फ़ुज़ूल है, अपने काम में मस्त रहना यह अपना उसूल है
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
मुझे लड़की चाहिए kurkure जैसी जो टेढ़ी हो पर मेरी हो।