वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है

वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है

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सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”

कदर करनी है तो जीते जी करो अर्थी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं.......

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”

कदर करनी है तो जीते जी करो अर्थी उठाते वक़्त तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं.......

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है