तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा

तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा

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हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है

जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

ज़्यादा इंतज़ार करने की आदत नहीं है मुझे मोहब्बत है तो पास आओ वरना भाड़ में जाओ

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है

जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

ज़्यादा इंतज़ार करने की आदत नहीं है मुझे मोहब्बत है तो पास आओ वरना भाड़ में जाओ