जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं

जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं

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दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं