ज़माने की नज़र में थोड़ा सा अकड़ कर चलना सीख लो दोस्त मोम जैसा दिल लेकर फिरोगे तो लोग जलाते ही रहेगें

ज़माने की नज़र में थोड़ा सा अकड़ कर चलना सीख लो दोस्त मोम जैसा दिल लेकर फिरोगे तो लोग जलाते ही रहेगें

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मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |

बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं

सिक्का दोनों का होता है हेड का भी ओर टेल का भी पर वक़्त उसी का आता है जो पलट कर ऊपर आता है |

मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |

बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं

सिक्का दोनों का होता है हेड का भी ओर टेल का भी पर वक़्त उसी का आता है जो पलट कर ऊपर आता है |