शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै
मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.
शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै
मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.