नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता

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औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया

सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं

न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम

मेरी बदमाशी का अंदाज़ा तुम इस चीज़ से लागलो जब में शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश कह कर बुलाते थे

किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |

ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.

औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया

सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं

न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम

मेरी बदमाशी का अंदाज़ा तुम इस चीज़ से लागलो जब में शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश कह कर बुलाते थे

किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |

ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.