धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया
धोखा बहुत मिल गया अब मौके की तलाश है
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते
मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया