मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती

मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती

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हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है

औकात में रखना था जिसे, गलती से दिल में रख लिया उसे |

ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है

औकात में रखना था जिसे, गलती से दिल में रख लिया उसे |

ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं