खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
जो उड़ने का शोंक रखते है, वो गिरने का खौफ नहीं रखते..
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
जो उड़ने का शोंक रखते है, वो गिरने का खौफ नहीं रखते..
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो