ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो
अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो
अभी उड़ने दो इन कबूतरों को जब हम आएंगे आसमान खुद ही खाली हो जायेगा
हम बाते हालत के हिसाब से करते है