मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती

मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती

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मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं, रातों से लड़ना पड़ता |