ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
हमसे उलझने से पहले हमारा इतिहास जान लो सीधा चेहरा इतिहास गहरा
ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.
ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
हमसे उलझने से पहले हमारा इतिहास जान लो सीधा चेहरा इतिहास गहरा
ये जो हालात है मेरे एक दिन सुधर जाएगे मगर काफी लोग मेरे दिल से उतर जाएगे.