ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा
बुराई भी होनी ज़रूरी है छोटे हर रोज़ तारीफ मिलेगी तोह आगे नहीं बढ़ पाएगे
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो
ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा
बुराई भी होनी ज़रूरी है छोटे हर रोज़ तारीफ मिलेगी तोह आगे नहीं बढ़ पाएगे
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो