अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

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आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला

आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा

कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला