अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

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हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये

सबर कर रहा हूं मुसीबत के दिन गुजर जाने दो, आज जो देखकर हंसते हैं कल बस देखते रह जाएंगे

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये

सबर कर रहा हूं मुसीबत के दिन गुजर जाने दो, आज जो देखकर हंसते हैं कल बस देखते रह जाएंगे

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .

अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे