आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
वक्त का ख़ास होना जरूरी नहीं है ख़ास के लिए वक्त होना जरूरी है
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान