तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
किसी ने क्या खूब लिखा है, मैं पसंद तो बहुत हूँ सबको पर जब उनको मेरी जरूरत होती है तब ..
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना
किसी ने क्या खूब लिखा है, मैं पसंद तो बहुत हूँ सबको पर जब उनको मेरी जरूरत होती है तब ..