जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

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प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है

प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !

जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है