जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

Share:

More Like This

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं

तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे

तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं

तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे

तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं