जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

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नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है

शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते

नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरों की तरह ये आदत नहीं हमारी

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है

शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते