जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी
इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी
इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं