जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

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तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

बेटा झूले पे झूल लेकिन अपनी औकात मत भूल

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥