जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

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मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है

मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे

कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है

मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.

जिसे आज मुजमे हजार एब नजर आते हे , कभी वही लोग हमारी गलती पे भी ताली बजाते थे

कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!