ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
अच्छे काम में डर लगे तो याद रखना, यह संकेत है कि आप का काम वाकई में बहादुरी से भरा है अगर इसमें डर और रिस्क नहीं होता तो हर कोई कर लेता
दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
अच्छे काम में डर लगे तो याद रखना, यह संकेत है कि आप का काम वाकई में बहादुरी से भरा है अगर इसमें डर और रिस्क नहीं होता तो हर कोई कर लेता
दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है