इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

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प्रतिभा ईश्वर से मिलती है, नतमस्तक रहें..! ख्याति समाज से मिलती है, आभारी रहें..! लेकिन मनोवृत्ति और घमंड स्वयं से मिलते है

काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.

दूसरों को अपने बारे में सफाई देकर अपना वक्त खराब न करें क्योंकि लोग उतना ही समझते हैं जितनी उनकी औकात होती हैं

एक दिन में जितना मोबाइल चलाते हो..उतना ही दिमाग चलाओगे तो ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओगे

आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं कल नहीं

अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है

प्रतिभा ईश्वर से मिलती है, नतमस्तक रहें..! ख्याति समाज से मिलती है, आभारी रहें..! लेकिन मनोवृत्ति और घमंड स्वयं से मिलते है

काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.

दूसरों को अपने बारे में सफाई देकर अपना वक्त खराब न करें क्योंकि लोग उतना ही समझते हैं जितनी उनकी औकात होती हैं

एक दिन में जितना मोबाइल चलाते हो..उतना ही दिमाग चलाओगे तो ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओगे

आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं कल नहीं

अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है