इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

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विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है

सभी औषधियों में अमृत प्रधान है. सभी सुखों में भोजन प्रधान है. सभी इन्द्रियों में आँख मुख्य है. सभी अंगों में सिर महत्वपूर्ण है.

साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’

जिंदगी में समस्या तो हर दिन नई खड़ी है, जीत जाते है वो जिनकी सोच कुछ बड़ी है आओ...आज मुश्किलों को हराते हैं चलो, आज दिन भर मुस्कुराते हैं..!!

पूरे की ख्वाहिश में इंसान बहुत कुछ खोता है भूल जाता है की आधा चांद भी खूबसूरत होता है

हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा

विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है

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साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’

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हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा