निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
मूर्ख का हृदय सूना रहता है, पुत्र रहित घर सुना रहता है, लेकिन गरीब का घर इनसे कहीं अधिक सूना रहता है. अतः आदमी को परिश्रम करके इस पर विजय पानी चाहिए.
इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग
ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
कामयाबी का इंतजार करने से बेहतर है, उसके लिए कोशिश की जाए
झूठ बोल कर कुछ पाने से अच्छा है सच बोलकर उसे खो दो
निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
मूर्ख का हृदय सूना रहता है, पुत्र रहित घर सुना रहता है, लेकिन गरीब का घर इनसे कहीं अधिक सूना रहता है. अतः आदमी को परिश्रम करके इस पर विजय पानी चाहिए.
इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग
ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
कामयाबी का इंतजार करने से बेहतर है, उसके लिए कोशिश की जाए
झूठ बोल कर कुछ पाने से अच्छा है सच बोलकर उसे खो दो