इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

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एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.

ज़िन्दगी में यही देखना ज़रूरी नहीं है, कि कौन हमारे आगे है या कौन हमारे पीछे.... कभी यह भी देखना चाहिये कि,  हम किसके साथ हैं, और कौन हमारे साथ है.....

गलत व्यक्ति कितना भी मीठा बोले, एक दिन आपके लिए "बीमारी" बन जाएगा अच्छा व्यक्ति कितना भी कड़वा लगे, एक दिन "औषधि" बन कर काम आएग

जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.

ज़िन्दगी में यही देखना ज़रूरी नहीं है, कि कौन हमारे आगे है या कौन हमारे पीछे.... कभी यह भी देखना चाहिये कि,  हम किसके साथ हैं, और कौन हमारे साथ है.....

गलत व्यक्ति कितना भी मीठा बोले, एक दिन आपके लिए "बीमारी" बन जाएगा अच्छा व्यक्ति कितना भी कड़वा लगे, एक दिन "औषधि" बन कर काम आएग

जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।