जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.
जीवन में सुखी रहने के लिए दो शक्तियों का होना जरूरी है पहली सहनशक्ति और दूसरी समझ शक्ति
"निर्मल" रहिए... वरना
नसीहत वो सच्चाई है, जिसे हम कभी ध्यान से नही सुनते। और तारीफ वो धोखा है, जिसे हम हमेशा ध्यान से सुनते हैं।
दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है
जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.
जीवन में सुखी रहने के लिए दो शक्तियों का होना जरूरी है पहली सहनशक्ति और दूसरी समझ शक्ति
"निर्मल" रहिए... वरना
नसीहत वो सच्चाई है, जिसे हम कभी ध्यान से नही सुनते। और तारीफ वो धोखा है, जिसे हम हमेशा ध्यान से सुनते हैं।
दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है