इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

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दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये

तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया

वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!

अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते तो Focus अपने काम पर करो लोगो की बातों पर नही

सैकड़ो अज्ञानी पुत्रो से एक गुणवान पुत्र अच्छा है रात्रि का अंधकार एक ही चंद्रमा दूर करता है न कि हजारों तारे

भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा

दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये

तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया

वक्त होता है बदलने के लिए, ठहरते तो बस लम्हे ही हैं ....!!

अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते तो Focus अपने काम पर करो लोगो की बातों पर नही

सैकड़ो अज्ञानी पुत्रो से एक गुणवान पुत्र अच्छा है रात्रि का अंधकार एक ही चंद्रमा दूर करता है न कि हजारों तारे

भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा