निंदा से घबराकर लक्ष्य को मत छोड़े क्योंकि निंदा करने वालों की राय लक्ष्य मिलते ही बदल जाती है
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
” जिस इंसान ने कभी ग़लती नहीं की उसने.. कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की।“
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं
निंदा से घबराकर लक्ष्य को मत छोड़े क्योंकि निंदा करने वालों की राय लक्ष्य मिलते ही बदल जाती है
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
दुनिया मे अधिक गम है उन सबको देखते हुए आपका बहुत कम है
” जिस इंसान ने कभी ग़लती नहीं की उसने.. कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की।“
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं