इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।

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इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो

प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है

खुशनसीब वो नहीं जिसका नसीब अच्छा है खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

अपने आपको किसी ना किसी काम मे व्यस्त रखो; क्योंकि व्यस्त इंसान को दुखी होने का समय नही मिलता..

प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?

इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो

प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है

खुशनसीब वो नहीं जिसका नसीब अच्छा है खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

अपने आपको किसी ना किसी काम मे व्यस्त रखो; क्योंकि व्यस्त इंसान को दुखी होने का समय नही मिलता..

प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?