इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो
आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए
"निर्मल" रहिए... वरना
तब तक लड़ना मत छोड़ो जब तक अपनी तय की हुई जगह पर पहुंच ना जाओ
इंसान वो लड़ाई कभी नहीं जीत सकता जिसमें दुश्मन उसके अपने हो
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो
आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए
"निर्मल" रहिए... वरना
तब तक लड़ना मत छोड़ो जब तक अपनी तय की हुई जगह पर पहुंच ना जाओ