समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
तन की जाने मन की जाने जाने चित्त की चोरी उस मालिक से क्या छुपावे जिसके हाथ है सब की डोर
बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये..!!