कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है

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यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!

ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.

समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

कभी दूसरों को दिखाने के लिए कोई काम मत करना काम ऐसे करें, कि सभी आपको देखते ही रह जाए

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता

यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते है तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी!

ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.

समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

कभी दूसरों को दिखाने के लिए कोई काम मत करना काम ऐसे करें, कि सभी आपको देखते ही रह जाए

संघर्ष के समय कोई नजदीक नही आता सफलता के बाद किसी को आमंत्रित नही करना पड़ता