तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही
जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी
हमेशा अपना best करो | जो तुम अभी बोते हो उसकी फसल बाद में काटते हो
पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं
तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही
जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी
हमेशा अपना best करो | जो तुम अभी बोते हो उसकी फसल बाद में काटते हो
पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं