"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"

"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"

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जब कोई आपसे दो कदम पीछे हटे तो उसे उम्र भर खुश रहने की दुआ देकर चार कदम पीछे हट जाने में ही भलाई है

इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है

महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से

जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!

अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है

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इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है

महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से

जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!

अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है