महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है

महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है

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मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही

एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.

अच्छे इन्सान की सबसे पहली और सबसे आखिरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज्जत करता है जिनसे उसे किसी किस्म के फायदे की उम्मीद नही होती..!

ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही

एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.

अच्छे इन्सान की सबसे पहली और सबसे आखिरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज्जत करता है जिनसे उसे किसी किस्म के फायदे की उम्मीद नही होती..!

ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है