किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

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अगर तुम सोचते हो कि तुम समय काट रहे हो, तो वहम में हो .. !! क्योंकि तुम समय काट नहीं रहे....... बल्कि यह समय " तुम्हें काट रहा है ।

वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..

बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना

अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते

अगर तुम सोचते हो कि तुम समय काट रहे हो, तो वहम में हो .. !! क्योंकि तुम समय काट नहीं रहे....... बल्कि यह समय " तुम्हें काट रहा है ।

वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..

बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना

अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते