किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है

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खुद मेँ झाँकने के लिए जिगर चाहिए दूसरों की शिनाख्त में तो हर शख़्स माहिर है

प्रेम सकल हो, भाव अटल हो मन को मन की आशा हो बिन बोले जो व्यथा जान ले वो अपनों की परिभाषा है

अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो

अहंकार में डूबे इंसान को न तो खुद की गलतियां दिखाई देती है ना ही दुसरो की अच्छी बातें

धार्मिक कथाओं को सुनने पर, श्मशान में और रोगियों को देखकर व्यक्ति कि बुद्धि को जो वैराग्य हो जाता है. यदि ऐसा वैराग्य सदा बना रहे तो भला कौन संसार के इन बंधनों से मुक्त नहीं होगा.

सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

खुद मेँ झाँकने के लिए जिगर चाहिए दूसरों की शिनाख्त में तो हर शख़्स माहिर है

प्रेम सकल हो, भाव अटल हो मन को मन की आशा हो बिन बोले जो व्यथा जान ले वो अपनों की परिभाषा है

अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो

अहंकार में डूबे इंसान को न तो खुद की गलतियां दिखाई देती है ना ही दुसरो की अच्छी बातें

धार्मिक कथाओं को सुनने पर, श्मशान में और रोगियों को देखकर व्यक्ति कि बुद्धि को जो वैराग्य हो जाता है. यदि ऐसा वैराग्य सदा बना रहे तो भला कौन संसार के इन बंधनों से मुक्त नहीं होगा.

सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।