होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
कभी पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि जो छूट गया वो आपका था ही नही
यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
कभी पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि जो छूट गया वो आपका था ही नही
यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है