इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है
अगर आपके बड़े सपने हैं तो उन्हें नकारात्मक लोगों से बचाए।
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।
अच्छे के साथ अच्छा बने बुरे के साथ बुरा नही क्योंकि हीरे से हीरे को तराश तो जा सकता है लेकिन कीचड़ से कीचड़ साफ नही हो सकता
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है
अगर आपके बड़े सपने हैं तो उन्हें नकारात्मक लोगों से बचाए।
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।
अच्छे के साथ अच्छा बने बुरे के साथ बुरा नही क्योंकि हीरे से हीरे को तराश तो जा सकता है लेकिन कीचड़ से कीचड़ साफ नही हो सकता