कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है भगवान सिर्फ लकीरें देता है रंग हमें ही भरना है | जय श्री कृष्णा
जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता
कर्मो से डरिये, ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है | कर्म माफ नहीं करते !!
कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में.
कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है भगवान सिर्फ लकीरें देता है रंग हमें ही भरना है | जय श्री कृष्णा
जय जय श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता
कर्मो से डरिये, ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देता है | कर्म माफ नहीं करते !!