मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है

मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है

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भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

बहुत गौर से देखने पर जिंदगी को जाना मैंने...दिल से बड़ा दुश्मन पूरे जमाने में नहीं है

काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता

काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.

कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !

तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो

भर्री महफ़िल में दोस्ती का ज़िकर हुआ, हमने तो सिर्फ आपकी और देखा और लोग वाह वाह कहने लगे

बहुत गौर से देखने पर जिंदगी को जाना मैंने...दिल से बड़ा दुश्मन पूरे जमाने में नहीं है

काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता

काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.

कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !

तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो