आप खुद नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो, जान हो हमारी पर जान से प्यारी हो, दूरियों क होने से कोई फर्क नही पड़ता आप कल भी हमारी थी और आज बी हमारी हो.
जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
हर पल बस फिकर सी होती है जब मोहब्बत किसी सी बेपनाह होती है
ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो
आप खुद नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो, जान हो हमारी पर जान से प्यारी हो, दूरियों क होने से कोई फर्क नही पड़ता आप कल भी हमारी थी और आज बी हमारी हो.
जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
हर पल बस फिकर सी होती है जब मोहब्बत किसी सी बेपनाह होती है
ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो