नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...

नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...

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खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है

क्या खबर थी की मुहब्बत हो जायेगी। हमें तो सिर्फ उनका मुस्कुराना अच्छा लगा था |

जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है

मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है

क्या खबर थी की मुहब्बत हो जायेगी। हमें तो सिर्फ उनका मुस्कुराना अच्छा लगा था |

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मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!