काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
बस तुम रूठा मत करो कभी मुझसे, क्यू की सुना है जान रूठ जाए तो कोई जी नहीं पता |
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
जरुरी नहीं कि इंसान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खूबसूरत हो, अच्छा तो वही इंसान होता है, जो तब आपके साथ हो, जब आपको उसकी जरुरत हो
मुझे भी ज़िन्दगी में तुम ज़रूरी मत समझ लेना, सुना है तुम ज़रूरी काम अक्सर भूल जाते हो…!!
काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.
ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मज़हब का है, ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
बस तुम रूठा मत करो कभी मुझसे, क्यू की सुना है जान रूठ जाए तो कोई जी नहीं पता |
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
जरुरी नहीं कि इंसान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खूबसूरत हो, अच्छा तो वही इंसान होता है, जो तब आपके साथ हो, जब आपको उसकी जरुरत हो
मुझे भी ज़िन्दगी में तुम ज़रूरी मत समझ लेना, सुना है तुम ज़रूरी काम अक्सर भूल जाते हो…!!