खुशिया मांगी थी मैंने खुदा से अपने लिया और देखो न मुझे तुम मिल गए
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबुत रखना जरा से भी चुके तो मोहबत हो जायेगी
कितना प्यार करते है तुमसे ये कहा नहीं जाता, बस इतना जानते है बिना तुम्हारे रहा नहीं जाता
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
खुशिया मांगी थी मैंने खुदा से अपने लिया और देखो न मुझे तुम मिल गए
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबुत रखना जरा से भी चुके तो मोहबत हो जायेगी
कितना प्यार करते है तुमसे ये कहा नहीं जाता, बस इतना जानते है बिना तुम्हारे रहा नहीं जाता
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया