कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…

कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…

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आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi

जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

देश भक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं! कह दो उन्हें… सीने पर जो जख्म हैं, सब फूलों के गुच्छे हैं, हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं!

वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..

यूनान-ओ-मिस्र-ओ रोमा सब मिट गए जहाँ से। अबतक मगर है बाकि नाम-ओ-निशाँ हमारा। कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों से रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा। सारे जहा से अच्छा हिन्दूस्तान हमारा हमारा..

आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi

जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

देश भक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं! कह दो उन्हें… सीने पर जो जख्म हैं, सब फूलों के गुच्छे हैं, हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं!

वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..

यूनान-ओ-मिस्र-ओ रोमा सब मिट गए जहाँ से। अबतक मगर है बाकि नाम-ओ-निशाँ हमारा। कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों से रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा। सारे जहा से अच्छा हिन्दूस्तान हमारा हमारा..