चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

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जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।

आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi

जश्न आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को|

ना पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी हैं हमारी पहचान तो सिर्फ ये हैं की हम सिर्फ हिंदुस्तानी हैं…!!

जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar

जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।

आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi

जश्न आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को|

ना पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी हैं हमारी पहचान तो सिर्फ ये हैं की हम सिर्फ हिंदुस्तानी हैं…!!

जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar