“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।