जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले
जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..
मेरी किस्मत में तो कुछ यूँ लिखा है, किसी ने वक्त गुज़ारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?
जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले
जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..
मेरी किस्मत में तो कुछ यूँ लिखा है, किसी ने वक्त गुज़ारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?