बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..
मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना
बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..
मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना
बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से