अब डर सा लगने लगा है मुझे उस हर शख्स से जो कहता है मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ूंगा
तू वही हैना जिसने पहले फसाया फिर हसाया और फिर अपना बनाकर खूब रुलाया
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
अब डर सा लगने लगा है मुझे उस हर शख्स से जो कहता है मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ूंगा
तू वही हैना जिसने पहले फसाया फिर हसाया और फिर अपना बनाकर खूब रुलाया
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।