हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था

हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था

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नए लोग से आज कुछ तो सीखा हे, पहले अपने जैसा बनाते हे फिर अकेला छोड़ देते है...

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद अच्छे इंसान से बदला लेते हैं

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

नए लोग से आज कुछ तो सीखा हे, पहले अपने जैसा बनाते हे फिर अकेला छोड़ देते है...

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद अच्छे इंसान से बदला लेते हैं

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में