हमे देखकर..अनदेखा कर दिया उसने, बंद आंखों से पहचानने का, कभी दावा किया था जिसने

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कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से

तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

क़दर करना सीख लो कहीं कोई थक ही न जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते

गया था मै तुझसे दुर बहुत कुछ पाने के लिए ……….पर सिवाए तेरी यादो के कुछ हासिल ना हुआ !!!!

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से

तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

क़दर करना सीख लो कहीं कोई थक ही न जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते

गया था मै तुझसे दुर बहुत कुछ पाने के लिए ……….पर सिवाए तेरी यादो के कुछ हासिल ना हुआ !!!!

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!