कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|
शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|
शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ