दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
अब डर सा लगने लगा है मुझे उस हर शख्स से जो कहता है मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ूंगा
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी
दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
अब डर सा लगने लगा है मुझे उस हर शख्स से जो कहता है मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ूंगा
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी