खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं
तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा
खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं
तेरी कसम सिर्फ तेरे हैं हम
सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा