सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

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पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..

पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..