सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

Share:

More Like This

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रौशनी.. उजालो के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल हैं..

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रौशनी.. उजालो के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल हैं..

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..