गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

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उसकी मेरी दोस्ती थी तो कमाल की, पर नाम दे के उसने सब बर्बाद कर दिया...!!

बड़े अजीब से इस दुनिया के मेले हैं, यूँ तो दिखती भीड़ है, पर फिर भी सब अकेले हैं

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

उसकी मेरी दोस्ती थी तो कमाल की, पर नाम दे के उसने सब बर्बाद कर दिया...!!

बड़े अजीब से इस दुनिया के मेले हैं, यूँ तो दिखती भीड़ है, पर फिर भी सब अकेले हैं

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

खुद पर भरोसा करना सिख़लो सहारा चाहे कितना ही सच्चा हो एक ना एक दिन साथ छोड़ ही देता हैं

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !