गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

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तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.