जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है
पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते
जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.
जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है
पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते
जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.