बेवजा बेवफाओ को याद किये हैं, गलत लोगों पे बहुत वक़्त बरदाद किये हैं.
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
आज कितने दिनो बाद हुई यह बरसात याद दिलाती यह आपकी हर बात......
लाख कसमे देदो किसी को मगर छोड़ने वाले छोड़ ही जाते है `
तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है
बेवजा बेवफाओ को याद किये हैं, गलत लोगों पे बहुत वक़्त बरदाद किये हैं.
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
आज कितने दिनो बाद हुई यह बरसात याद दिलाती यह आपकी हर बात......
लाख कसमे देदो किसी को मगर छोड़ने वाले छोड़ ही जाते है `
तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है