काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

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एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

बड़े अजीब से इस दुनिया के मेले हैं, यूँ तो दिखती भीड़ है, पर फिर भी सब अकेले हैं

उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं न अक्सर उनकी किस्मत बहुत खराब होती है

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

बड़े अजीब से इस दुनिया के मेले हैं, यूँ तो दिखती भीड़ है, पर फिर भी सब अकेले हैं

उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं न अक्सर उनकी किस्मत बहुत खराब होती है

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......