मालूम होते ही भूल गए हो शायद, यह फीर कमाल का सबर रखते हो ..

मालूम होते ही भूल गए हो शायद, यह फीर कमाल का सबर रखते हो ..

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सिर्फ इसी ‘कर्ज’ को अदा करने के वास्ते हम सारी रात नही सोते ‘ कि शायद ‘कोई’ जाग रहा हो इस दुनिया मे “हमारे ” लिए

“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”

छोड़ दिया है सबको बिना वजह तंग करना ऐ दोस्त जब कोई अपना समझता ही नहीं तो याद दिला कर क्या करना.

ये ठंडी सी रात तेरी याद दिलाती हैं मुझसे दूर है तू फिर भी तेरी आहट सुनाती हैं

उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!

ना मुस्कुराने को जी चाहता है; ना आंसू बहाने को जी चाहता है. लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में; बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है.

सिर्फ इसी ‘कर्ज’ को अदा करने के वास्ते हम सारी रात नही सोते ‘ कि शायद ‘कोई’ जाग रहा हो इस दुनिया मे “हमारे ” लिए

“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”

छोड़ दिया है सबको बिना वजह तंग करना ऐ दोस्त जब कोई अपना समझता ही नहीं तो याद दिला कर क्या करना.

ये ठंडी सी रात तेरी याद दिलाती हैं मुझसे दूर है तू फिर भी तेरी आहट सुनाती हैं

उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!

ना मुस्कुराने को जी चाहता है; ना आंसू बहाने को जी चाहता है. लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में; बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है.