संध्या की बैचेनी हैं तू, तेरी यादें इस कदर सताती हैं, दौड़ कर चले आते जहाँ हैं तू, काश हम पता जान पाते
अगर तुम देखना चाहो मेरे आँखों मै आंसु, तो मै रो रो के कहता हूं “चलो बस अब मान जाओ न”
आप रूठा न करो हमसे, हमारे दिल की धड़कन रुक जाती है, दिल तो आपके नाम हम कर ही चुके है, जान बाकी है वो भी निकल जाती है! सॉरी :
हाल-इ-दिल किससे कहे अपना, वो तो नाराज़ हुए बैठे हैं.. हम तो तैयार हैं मानाने क लिए, फिर भी वो जिद्द पे अड़े बैठे हैं..
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना जिंदगी में कोई कमी तो नहीं, फिर भी तेरे बिना जिंदगी उदास रहती है!!
संध्या की बैचेनी हैं तू, तेरी यादें इस कदर सताती हैं, दौड़ कर चले आते जहाँ हैं तू, काश हम पता जान पाते
अगर तुम देखना चाहो मेरे आँखों मै आंसु, तो मै रो रो के कहता हूं “चलो बस अब मान जाओ न”
आप रूठा न करो हमसे, हमारे दिल की धड़कन रुक जाती है, दिल तो आपके नाम हम कर ही चुके है, जान बाकी है वो भी निकल जाती है! सॉरी :
हाल-इ-दिल किससे कहे अपना, वो तो नाराज़ हुए बैठे हैं.. हम तो तैयार हैं मानाने क लिए, फिर भी वो जिद्द पे अड़े बैठे हैं..
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना जिंदगी में कोई कमी तो नहीं, फिर भी तेरे बिना जिंदगी उदास रहती है!!