माना कि हम बहुत लड़ते हे मगर प्यार भी बहुत करते है हमारे गुस्से की वजह से नाराज न हो जाना हम गुस्सा ऊपर से और प्यार दिल्से करते हे. सॉरी जी कान पकड़ते है :

माना कि हम बहुत लड़ते हे मगर प्यार भी बहुत करते है हमारे गुस्से की वजह से नाराज न हो जाना हम गुस्सा ऊपर से और प्यार दिल्से करते हे. सॉरी जी कान पकड़ते है :

Share:

More Like This

वो गुस्से में दूर से ही निहारा करते हैं, क्या बात हैं जाने क्यूँ इतने खफ़ा लगते हैं, कोई खता हुई हमसे तो बख्श दीजिये, हम तो हर वक्त आप ही को याद किया करते हैं

हाल-इ-दिल किससे कहे अपना, वो तो नाराज़ हुए बैठे हैं.. हम तो तैयार हैं मानाने क लिए, फिर भी वो जिद्द पे अड़े बैठे हैं..

हम से कोई गिला हो जाए तो सॉरी, आपको याद ना कर पाए तो सॉरी, वैसे दिल से आपको भूलेंगे नहीं, और हमारी धड़कन ही रुक जाए तो सॉरी…..

उसकी खुशियों के लिए लड़ें थे दुनियाँ से, आज वो ही हमसे खफ़ा बैठे हैं, क्या गुनाह हो गया हैं हमसे, हम सर झुकायें सजा पाने बैठे हैं.

न कभी मुस्कुराहट तेरे होठों से दूर हो.. तेरी हर ख्वाहिश हक़ीक़त को मंज़ूर हो.. हो जाये जो तू मुझसे खफा.. खुदा न करे मुझसे कभी ऐसा कसूर हो

हमसे खता हुई है अनजाने में, आगे से ऐसा न करेंगे जाने में, बड़ी मुश्किल से मिले हैं आप, नहीं जाइये छोड़कर हमें इस वीराने में. ऍम सो सॉरी

वो गुस्से में दूर से ही निहारा करते हैं, क्या बात हैं जाने क्यूँ इतने खफ़ा लगते हैं, कोई खता हुई हमसे तो बख्श दीजिये, हम तो हर वक्त आप ही को याद किया करते हैं

हाल-इ-दिल किससे कहे अपना, वो तो नाराज़ हुए बैठे हैं.. हम तो तैयार हैं मानाने क लिए, फिर भी वो जिद्द पे अड़े बैठे हैं..

हम से कोई गिला हो जाए तो सॉरी, आपको याद ना कर पाए तो सॉरी, वैसे दिल से आपको भूलेंगे नहीं, और हमारी धड़कन ही रुक जाए तो सॉरी…..

उसकी खुशियों के लिए लड़ें थे दुनियाँ से, आज वो ही हमसे खफ़ा बैठे हैं, क्या गुनाह हो गया हैं हमसे, हम सर झुकायें सजा पाने बैठे हैं.

न कभी मुस्कुराहट तेरे होठों से दूर हो.. तेरी हर ख्वाहिश हक़ीक़त को मंज़ूर हो.. हो जाये जो तू मुझसे खफा.. खुदा न करे मुझसे कभी ऐसा कसूर हो

हमसे खता हुई है अनजाने में, आगे से ऐसा न करेंगे जाने में, बड़ी मुश्किल से मिले हैं आप, नहीं जाइये छोड़कर हमें इस वीराने में. ऍम सो सॉरी