वो गुस्से में दूर से ही निहारा करते हैं, क्या बात हैं जाने क्यूँ इतने खफ़ा लगते हैं, कोई खता हुई हमसे तो बख्श दीजिये, हम तो हर वक्त आप ही को याद किया करते हैं

वो गुस्से में दूर से ही निहारा करते हैं, क्या बात हैं जाने क्यूँ इतने खफ़ा लगते हैं, कोई खता हुई हमसे तो बख्श दीजिये, हम तो हर वक्त आप ही को याद किया करते हैं

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झगड़ा तभी होता है जब दर्द होता है, और दर्द तब होता है जब प्यार होता है…

अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…

माना भूल हो गई हैं हमसे, पर इस तरह रूठों ना मेरे सनम, एक बार नज़रे उठा कर देखों हमें, हम दौबारा ना करेंगे, ये खता, हैं कसम

सोचता हूँ ज़िंदा हूँ मांग लूं सब से माफ़ी, नजाने मरने के बाद कोई माफ़ करे या न करे. स्पेशल सॉरी टु यू..

पता है सॉरी भी आपको हमेशा वही इंसान बोलता है जिसके लिए आप उसकी ईगो.. और सेल्फ रेस्पेक्ट से भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होते हो उसकी लाइफ में..

अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.

झगड़ा तभी होता है जब दर्द होता है, और दर्द तब होता है जब प्यार होता है…

अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…

माना भूल हो गई हैं हमसे, पर इस तरह रूठों ना मेरे सनम, एक बार नज़रे उठा कर देखों हमें, हम दौबारा ना करेंगे, ये खता, हैं कसम

सोचता हूँ ज़िंदा हूँ मांग लूं सब से माफ़ी, नजाने मरने के बाद कोई माफ़ करे या न करे. स्पेशल सॉरी टु यू..

पता है सॉरी भी आपको हमेशा वही इंसान बोलता है जिसके लिए आप उसकी ईगो.. और सेल्फ रेस्पेक्ट से भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होते हो उसकी लाइफ में..

अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.