जब भरोसा टूट जाता है.. तब सॉरी की कोई वैल्यू नहीं रहती….
रूठी हो जनता हु मै, खफा हो मानता हु मै, गलती हुई है अब माफ़ कर दो, इतना सितम करोगे तो कही मर जाऊ न मैं.
अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
कुछ इस तरह से मैंने अपनी ज़िन्दगी को आसान किया, कुछ से माफ़ी मांगी, कुछ को माफ़ किया.
माना भूल हो गई हैं हमसे, पर इस तरह रूठों ना मेरे सनम, एक बार नज़रे उठा कर देखों हमें, हम दौबारा ना करेंगे, ये खता, हैं कसम
जब भरोसा टूट जाता है.. तब सॉरी की कोई वैल्यू नहीं रहती….
रूठी हो जनता हु मै, खफा हो मानता हु मै, गलती हुई है अब माफ़ कर दो, इतना सितम करोगे तो कही मर जाऊ न मैं.
अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…
अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.
कुछ इस तरह से मैंने अपनी ज़िन्दगी को आसान किया, कुछ से माफ़ी मांगी, कुछ को माफ़ किया.
माना भूल हो गई हैं हमसे, पर इस तरह रूठों ना मेरे सनम, एक बार नज़रे उठा कर देखों हमें, हम दौबारा ना करेंगे, ये खता, हैं कसम