लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।
जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की
जाने क्यू लोग दोस्ती करते है, और दोस्ती के आड़ मे दुश्मनी निभाते है।
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे.. कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना..
लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।
जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की
जाने क्यू लोग दोस्ती करते है, और दोस्ती के आड़ मे दुश्मनी निभाते है।
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे.. कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना..